October 12, 2026

लोहरसिंह गांव में वॉलीवाल खेल नहीं दिवानगी है 60 के दशक से शुरू हुआ खेल, अब तक 300 से अधिक खिलाड़ी

रायगढ़. गांव में अधिकतर कबड्डी और क्रिकेट के प्रति ही युवा और बच्चों में रूचि रहती है, लेकिन लोहरसिह ऐसा गांव हैं जहां के बच्चे, युवा और बुजुर्गों में वॉलीवाल के प्रति रूचि नहीं बल्कि दिवानगी है। यहां लगभग हर दूसरे से तीसरे घर में वॉलीवाल स्पर्धा में जीती हुई ट्राफी या शील्ड रखी हुई है। यह खेल गांव की पहचान बन चुकी है। बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक खिलाडिय़ों का अंदाजा लगाया जाए तो करीब ३ सौ खिलाड़ी इसी गांव से निकलेंगे। इसमें जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के खिलाड़ी हैं।
इस गांव के खिलाड़ी व सरकारी कर्मचारी कामता प्रसाद गुप्ता बताते हैं। खेल की शुरुआत करीब 60 के दशक में मानूराम गुप्ता, रामधन नायक, भुवनेश्वर गुप्ता, उसत गुप्ता, घनश्याम गुप्ता, गनपत गुप्ता, बालमुकुंद नायक व बालमुकुंद गुप्ता सहित अन्य के द्वारा की गई। यह सभी अपने समय के वॉलीवाल चैपिंयन रह चुके हैं। करीब 25 सौ से तीन हजार की आबादी वाले इस गांव के प्रत्येक घर में वॉलीवाल का खिलाड़ी मौजूद हैं। यहां खेल को बढ़ावा देने के लिए गांव में ही राज्य स्तरीय वॉलीवाल प्रतियोगिता आयोजित कराई जाती है। हालांकि कोरोना के दौर के बाद राज्य स्तर की प्रतियोगिता नहीं हो रही है, लेकिन यहां के बच्चे अभी भी खेल का अभ्यास लगातार कर रहे हैं। यहां के रहने वाले लोचन गुप्ता बताते हैं कि इससे पहले हुए स्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर के वॉलीवाल स्पर्धा दिनेश सिन्हा भी इस गांव में पहुंचे थे। वहीं नागपुर, ओडिशा, पुणे, हैदराबाद, विशाखापट्नम, पंजाब सहित अन्य प्रांतों खिलाड़ी यहां खेलने के लिए आए हैं। लोचन गुप्ता का कहना है कि इस गांव में जब राज्य स्तरीय वॉलीवाल प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी तब गांव की हर गली में चार पहिया व दो पहिया वाहनों से पट जाती थी और स्थिति यह बनती थी कि वाहनों का पार्किंग खेतों में किया जाता था। स्पर्धा के दौरान चियर गर्ल बुलाए जाते थे।
हर घर में शील्ड और मैडल
गांव के अधिकांश घरों में मैडल और शील्ड की भरमार है। इस गांव के निवासी व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि डोल नायक बताते हैं कि वॉलीवाल स्पर्धा में विजयी होने के बाद पाए गए शील्ड और मैडल का इक_ा किया जाए तो एक ट्रैक्टर से कहीं अधिक होगा। गांव के कई परिवार शील्ड, ट्राफी और मैडल को अभी भी बड़ी हिफाजत के साथ रखे हैं।
खेल के दम पर १२ व्यायाम शिक्षक
यहां के प्रतिभावान खिलाड़ी खेल के दम पर अपनी मुकाम भी हालिस किया है। गांव के वॉलीवाल खिलाडिय़ों में करीब 50 से अधिक सरकारी नौकरी पर हैं। सबसे अधिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। इसमें से वॉलीवाल खेलने वाले १२ खिलाड़ी तो विभिन्न स्कूलों में व्यायाम शिक्षक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा पुलिस सहित अन्य विभागों में अपनी सेवा दे रहे हैं।
इस गांव से निकले नेशनल प्लेयर
इस गांव के नेशनल खिलाडिय़ों पर गौर करें तो कामता प्रसाद गुप्ता, केके पटेल, ओंकार गुप्ता, खीरसागर गुप्ता, भोजराम नायक, प्रेम शंकार नायक, जीवन नायक, विक्की, चंद्रमणि गुप्ता, ठाकुर गुप्ता, परमेश्वर गुप्ता, हेम सागर गुप्ता सहित कई अन्य शामिल हैं।

लोहरसिह गांव में वॉलीवाल काफी प्रसिद्ध है। इस गांव का मैं निवासी होने के साथ वॉलीवाल खिलाड़ी रहा हूं और आज शिक्षा विभाग में सेवा दे रहा हूं।
जीवन नायक, प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी, रायगढ़

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