October 12, 2026

वर्षा जल सहेजने आज भी अनुकरणीय है पुराने जमाने की विधि सारंगढ़ में रियासतकाल से लागू किया गया है सिस्टम

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आपस में जुडें थे करीब 28 तालाब, अब सिर्फ 4 तालाब आपस मे जुड़े है,

रायगढ़. सारंगढ़ में वर्षा जल सहेजने की विधि आजादी के पहले रिसायतकाल में विकसीत की गई थी। यह विधि आज भी अनुकरणीय है। बारिश होने पर एक के बाद एक तालाब बारी-बारी लबालब होते हैं। रियासतकालीन समय में करीब 28 तालाबों को आपस में जोड़ा गया था। अभी भी चार तालाब आपस में जुड़े हुए हैं। पहली बारिश से ही इन तालाबों में पानी भरना शुरू हो जाता है।
रायगढ़ जिले से अलग होकर नया जिला बना सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सारंगढ़ को तालाबों का शहर कहा जाता है। यहा पर सबसे बड़ा मुड़ा तालाब है, जो शहर के मुहाने पर बसा है। बारिश होते ही गोमर्डा अभ्यारण्य के पठारों से यहां पर पानी बहकर आता है। इस तालाब का कैटिच एरिया इतना शानदार है कि मानसून की पहली वर्षा से ही यह तालाब लबालब हो जाता है। इसके साथ में नेगी तालाब जुड़ा हुआ है। वही इसके साथ खाड़ाबंद तालाब भी जुड़ा हुआ है। यहां पानी भरने के बाद इसके बाजू में जुड़ा हुआ गर्जना तालाब है जो कि वर्तमान पुलिस थाना के पीछे है। यहा पर मवेशियों और मछली पालन के लिए ज्यादा उपभोग किया जाता था। इसके अलावा लोहरिन डबरी तालाब है, जो कि जेलपारा और अन्य मोहल्ले के निस्तारी के लिए उपयोग में लाया जाता है। इनके अलावा सारंगढ़ मे पैलपारा का तिवारी तालाब, प्रतापगंज का तालाब, सहसपुर का तालाब और रायगढ़ रोड़ में तालाब स्थित है, लेकिन मुख्यरूप से इन 7 तालाबों को जल संरक्षण और पर्यावरण हित में ज्यादा महत्व दिया जाता था।

तालाब के पानी से पकता था भोजन

यहां के रहने वाले राम मनहर बताते हैं रियासतकालीन समय में खाड़ाबंद तालाब जीवनदायिनी तालाब के नाम से जाना जाता था। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि पूर्व में इस तालाब के पानी से घरों मे खाना पकाया जाता था। यहा पर स्नान करना प्रतिबंधित था।

अन्य नगरों के प्रतिनिधि पहुंचे थे देखने

यहां के बुजुर्ग रामेश्वर साहू बताते हैं कि सारंगढ़ नगर पालिका का गठन 1919 में किया गया था। आसपास के छोटे नगरों में सारंगढ़ रियासत नगर सबसे पहले नगर पालिका बनने वाला नगर था। पानी की पर्याप्त सुविधा प्रदान करने के मामले में सारंगढ़ नगर का विशेष महत्व था। इस सिस्टम अंग्रेजों के शासन काल में सारंगढ़ मे विकसित किया गया था, जिसको देखने के लिए अन्य नगरों के प्रतिनिधि सारंगढ़ पहुंचते थे।

रियासत काल में इस तरह आपस में जुड़े हैं तालाब

सारंगढ़ के गोमर्डा अभ्यारण्य के पठारों का पानी वर्षाकाल में मुड़ा तालाब में आता है। इस तालाब को एक लेबल तक भरने के बाद बगल में स्थित नेगी तालाब कनेक्ट है। जैसे ही लेबल पूरा होता है यहा का पानी नेगी तालाब में जाना शुरू हो जाता है। वही नेगी तालाब भी एक लेबल तक भरने के बाद यह तालाब खाड़ाबंद तालाब से कनेक्ट है। नेगी तालाब का पानी एक लेबल के बाद खाड़ाबंद तालाब भरता है। वही इसके बाद खाड़ाबंद तालाब का पानी अंडर ग्राऊंड नाली के साथ नया तालाब के साथ जुड़ा हुआ है। तीनों तालाब में प्यास बुझऩे के बाद बाकि पानी नया तालाब में भरता है। नया तालाब का वेस्ट पानी एक नाला के रूप में तुर्की तालाब में जाता था। तुर्की तालाब पूर्ण भर जाने के बाद उसका पानी गर्जना तालाब में जाता था। गर्जना तालाब का पानी भी वेस्ट वेयर के रूप मे लोहरिन डबरी में जाता था।

जिस काल में पर्यावरण और संरक्षण शब्दों का सामाजिक प्रादुर्भाव नहीं हुआ था तब सारंगढ़ के आदिवासी राजा ने अपने नए बसाए नगर में वर्षा के जल के संचयन और भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के लिए एक विशाल किन्तु अत्यन्त सरल प्रणाली का निर्माण किया था। मैग्सेसे पुरस्कार विजेता “वॉटर-मैन” के रूप में विख्यात राजेन्द्र सिंह के अनुसार सारंगढ़ के अलावा भारत में इस तरह की जल संचयन प्रणाली केवल जैसलमेर में है।
डॉ. परिवेश मिश्रा, राज परिवार, सारंगढ़ रियासत

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