घर की दहलीज लांघते ही बदल जाता है प्रदेश एक दूसरे के पड़ोसी होकर भी एक दूसरे के प्रदेश की योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
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रायगढ़. प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे सारंगढ़ बिलाईगढ़ के बरमकेला विकास खंड का घोघरा ऐसा गांव है जहां सड़क के एक छोर पर ओडिशा प्रांत है तो दूसरी छोर पर छत्तीसगढ़ है। यहां स्थिति ऐसी है कि घर के बाहर चंद कदम चलने पर गांव ही नहीं पूरा प्रदेश बदल जाता है। इससे एक गांव के मुख्य सड़क के एक-दूसरे छोर पर रहने वाले पड़ोसियों को प्रदेश की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत घोघरा पंचायत है। इस पंचातय के अधीन बेहराबहाल और सोनबला गांव है। घोघरा, बेहराबहाल और सोनबला तीनों गांव की आबादी करीब १४ सौ बताई जा रही है। इसमें घोघरा गांव ओडिशा बार्डर पर बसा हुआ है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ को अलग करने के लिए यहां कोई नदी या नहर नहीं बल्कि गांव की ही एक पक्की सड़क है। पक्की सड़क के एक ओर रहने वाले लोग छत्तीसगढ़ के घोघरा पंचायत में आते हैं। वहीं सड़क के दूसरी ओर रहने वाले लोग ओडिशा प्रांत में कंधपड़ा में आते हैं। हालांकि घोघरा गांव के लोग कंधपड़ा को एक मोहल्ला मानते हैं, लेकिन यह वास्तविक में ओडिशा प्रांत के बरगढ़ जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत नारंगपुर के अधीन आने वाला गांव है। कंधपड़ा में करीब २० से २५ परिवार निवास करते हैैं, जबकि घोघरा में ४० से ५० परिवार निवास कर रहे हैं। अब इन परिवारों की स्थिति यह है कि एक गांव में रहने की वजह से वे एक दूसरे के पड़ोसी तो जरुर हैं, लेकिन दोनों प्रदेशों की सरकारी योजनाओं का लाभ पड़ोसी रहते हुए भी नहीं उठा सकते।
ओडिशा के सरकारी दस्तावेज छग में प्रांरभिक शिक्षा
कंधपड़ा में रहने वाले लोगों सरकारी दस्तावेज ओडिशा प्रांत के हैं। आधार कार्ड और राशन कार्ड ओडिशा राज्य सरकार द्वारा बनाया गया है, जबकि गांव के सारे बच्चे अपनी प्रारंभिक शिक्षा घोघरा गांव के प्राइमरी स्कूल में पूरी करते हैं। ओडि़शा की सीमा में आने वाले गांव के हिस्से में या फिर आस-पास कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है। इसकी वजह से यहां के ग्रामीणों को बच्चे को छत्तीसगढ़ की स्कूल में पढ़ाना पड़ता हैं।
पहले पूरी तरह थे आश्रित अब राहत
कंधपड़ा में रहने वाले लोग मौजूदा समय में शिक्षा के लिए छत्तीसगढ़ पर ही आश्रित हैं। यहां के बच्चे प्रारंभिक शिक्षा घोघरा के स्कूल में लेते हैं। इसी तरह चिकित्सा सेवा भी प्रदेश के अस्पतालों से लिया जाता है। यहां के ग्रामीण जितेंंद्र साव बताते हंै कि कुछ साल पहले तक बिजली, पानी व अन्य सुविधा के लिए भी वे छत्तीसगढ़ पर ही आश्रित थे, लेकिन अब धीरे-धीरे बिजली पानी की सुविधा वहां ओडिशा सरकार ने भी पहुंचाई है।
छग में शामिल करने की गई मांग
कंधपड़ा में रहने वाले लोगों के द्वारा लंबे समय तक उन्हें छग में शामिल किए जाने कीमांग की जाती रही, लेकिन हर बार उनकी मांग नजरअंदाज ही हुई। ऐसे में वे अभी
हमारे गांव के मुख्य सड़क के एक छोर पर ओडिशा है दूसरे छोर पर छत्तीगढ़ है। ओडिशा में रहने वाले बच्चे यहां के स्कूल में पढ़ाई करते हैं। हमे ऐसा नहीं लगता कि वे ओडिशा प्रांत के रहने वाले हैं।
मनबोध चौहान, सरपंच, घोघरा
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