October 26, 2026

Exclusive सरगुजा-रायगढ़ सीमा पर रहस्यमयी पत्थरों का मिला जखीरा

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विशेष रूप से तराशे गए यह पत्थर प्राचीन निर्माण या किसी गुमनाम सभ्यता की निशानी माने जा रहे हैं

रायगढ़। सरगुजा और रायगढ़ जिले की सरहद पर घने जंगल में पत्थरों का एक रहस्यमयी जखीरा मिला है। यह पत्थरों का समूह अपने भीतर न जाने कितनी पुरानी कहानियां छिपाए हुए है। इन पत्थरों की बनावट ऐसी है, जिसे देखकर मन में सवाल उठता है कि आखिर इन्हें यहां किसने और क्यों रखा। कल्पना की जा सकती है कि सैकड़ों साल पहले यहां लोगों की आवाजाही रही होगी। संभवतः यहां कोई प्राचीन निर्माण हो रहा होगा, जहां कारीगर बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर उन्हें अलग-अलग आकार देते थे। यह पत्थर किसी पुराने मंदिर, स्मारक या इमारत का हिस्सा हो सकते हैं, जो समय के साथ टूटकर जमीन पर गिर गए। धीरे-धीरे मौसम और हवाओं के असर से आसपास की जमीन का स्वरूप भी बदला। जिन लोगों ने कभी इन पत्थरों को अपने हाथों से आकार दिया होगा, वे आज इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन उनकी बनाई यह संरचना आज भी मौजूद है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन पत्थरों की असली पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। एक जानकार ने बताया कि उन्होंने सर्वप्रथम 1994 में यहां का सर्वे किया था और तब से लगातार प्रयास जारी हैं। यह किसी प्राचीन सभ्यता की निशानी है, किसी ऐतिहासिक इमारत का अवशेष है, या फिर इसके पीछे कोई ऐसी कहानी छिपी है, जिसे समय के साथ लोग भूल गए? इसका जवाब जानने के लिए इनकी बनावट, आसपास बिखरे पत्थरों और इस स्थान के इतिहास की गहराई से जांच करना आवश्यक है। इतिहास हमेशा किताबों में दर्ज नहीं होता, कई बार उसके निशान धरती पर बिखरे पत्थरों के रूप में भी मिलते हैं। इन पत्थरों की खास बनावट देखकर लगता है, जैसे इन्हें कभी किसी विशेष काम के लिए तराशा गया हो।

पुरातत्व सर्वेक्षण की आवश्यकता 

सरगुजा और रायगढ़ सीमा पर मिले ये रहस्यमयी पत्थर क्षेत्र के इतिहास और प्राचीन सभ्यताओं पर प्रकाश डाल सकते हैं। इनकी वैज्ञानिक जांच और पुरातत्व सर्वेक्षण से कई अनसुलझे रहस्य खुल सकते हैं। यह स्थान छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए एक नया आकर्षण बन सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। गहन शोध से इन पत्थरों की वास्तविक पहचान स्थापित हो सकेगी।

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