October 18, 2026

SIR प्रक्रिया निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक: ओपी चौधरी

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वित्त मंत्री ने बताया, SIR से मृत व फर्जी नाम हटेंगे, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होगा

रायगढ़. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने मीडिया से विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया सही है और आजादी के बाद से यह कार्य होता रहा है। समय-समय पर इस स्वाभाविक प्रक्रिया का होना बहुत जरूरी है। चौधरी ने SIR की आवश्यकता बताते हुए कहा कि अनेक मतदाताओं की स्वाभाविक मृत्यु हो जाती है, जिनके नाम सूची में रह जाते हैं। इन मृत नामों का दुरुपयोग करते हुए गलत लोग फर्जी मतदान करने की कोशिश करते हैं। कई बार घुसपैठिए भी भ्रामक जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम जुड़वा देते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए SIR की प्रक्रिया स्वाभाविक है। भारत जैसे लोकतंत्र में मतदाता सूची जितनी परिमार्जित और शुद्ध रहेगी, चुनावी प्रक्रिया उतनी ही विशुद्ध रूप से चलेगी। इसलिए SIR आवश्यक है और हर दशक में होती रहती है, कांग्रेस के समय में भी यह प्रक्रिया हुई है। इस मामले में विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर अविश्वास पैदा करने का षड्यंत्र कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ विदेशी ताकतों की सह पर चल रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में अराजकता फैलाना है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया में हर पार्टी के एजेंट शामिल होते हैं, दावा-आपत्ति का समय दिया जाता है और उसके बाद ही सूची अंतिम होती है। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता दिखाते हुए सॉफ्ट कॉपी भी उपलब्ध कराई है। यदि किसी का नाम कटा है, तो उसे जोड़ने की प्रक्रिया हमेशा खुली रहती है, ऑनलाइन आवेदन कर कोई भी सही व्यक्ति अपना नाम आसानी से जुड़वा सकता है। उन्होंने अपने जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी होती है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण का महत्त्व

मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की नींव होता है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल पात्र नागरिक ही मतदान कर सकें, जिससे चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे। मृत मतदाताओं के नाम हटाने, पते बदलने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने से सूची सटीक रहती है। यह फर्जी मतदान और अन्य अनैतिक चुनावी प्रथाओं को रोकने में मदद करता है, जिससे जनता का विश्वास मजबूत होता है और निष्पक्ष चुनाव संभव हो पाते हैं।

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