October 19, 2026

कंटीले डंडे की मार सहकर गढ़वीर बनने वाला करता है रावण दहन

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सारंगढ़ में दशहरा की अनोखी। परंपरा

 

रावण दहन के पहले होती है साहस की पहचान

100 साल से गढ़ विच्छेदन

युवा चढ़ते हैं मिट्टी के चिकने गढ़ पर

रायगढ़/सारंगढ़. छत्तीसगढ़ के नए जिले सारंगढ़ में दशहरा पर्व अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां 100 वर्ष से अधिक समय से ‘गढ़ विच्छेदन’ की परंपरा चली आ रही है, जिसकी शुरूआत सारंगढ़ राजपरिवार ने की थी। यह परंपरा आज भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है। गढ़ विच्छेदन में युवा मिट्टी के एक चिकने गढ़ पर चढ़ाई करते हैं। इस गढ़ को मिट्टी और गोबर के लेप से अत्यंत चिकना बनाया जाता है। गढ़ के ऊपरी भाग को राजमहल के किले का रूप देकर सजाया जाता है। प्रतिभागी कांटेनुमा लोहे के पंजे का उपयोग कर गीली मिट्टी पर फिसलते-संभलते हुए ऊपर चढ़ने का प्रयास करते हैं। यह कार्य सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उतना ही चुनौतीपूर्ण है। गढ़ के ऊपर पहले से तैनात स्वयंसेवक डंडों से नीचे से चढ़ रहे युवाओं पर प्रहार करते हैं। गढ़वीर वही बनता है जो इन प्रहारों को सहते हुए सबसे पहले गढ़ के शीर्ष पर पहुंचकर उसे तोड़ देता है। एक साथ कई युवा प्रतिभागी गढ़ पर चढ़ने की कोशिश करते हैं, जिससे यह प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक हो जाती है। यह परंपरा दशहरा के मूल संदेश, यानी बुराई पर अच्छाई की जीत, को एक अनूठे ढंग से दर्शाती है, जहां शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन किया जाता है। देश भर में जहां रावण दहन कर इस पर्व को मनाया जाता है, वहीं सारंगढ़ की यह अपूर्व परंपरा इसे एक विशिष्ट पहचान देती है।

अंतिम चरण में तैयारी

इस साल भी इसके लिए तैयारी शुरू कर दे गई है, जो अंतिम चरण में है। दशहरा पर्व को लेकर यहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचते है। रात भर विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

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